भारत रूसी तेल खरीद जारी रखेगा, अमेरिकी छूट समाप्त होने के बाद भी

भारत रूसी तेल खरीद जारी रखेगा, अमेरिकी छूट समाप्त होने के बाद भी

जब भारत सरकार ने सुजाता शर्मा, पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि वह रूस से कच्चे तेल की खरीद पर किसी भी तरह के दबाव को नहीं मानेगी, तो बाजार में एक राहत की सांस ली गई। 17 मई 2026 को हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही गई कि भले ही अमेरिकी प्रतिबंधों में दी गई छूट समाप्त हो गई है, लेकिन भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है।

यहाँ बात सिर्फ तेल की नहीं है; यह एक भू-राजनीतिक बयानबंदी है। भारत ने मई 2026 में रूस से प्रतिदिन 23 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश अपने आपूर्ति स्रोतों को विविधीकृत करने और लागत कम करने की अपनी रणनीति पर अडिग है। चाहे अमेरिका कुछ भी कहें, भारत का रुख स्पष्ट है: हम जहां से सस्ता और उपलब्ध तेल मिले, वहां से खरीदेंगे।

अमेरिकी छूट समाप्त, लेकिन भारतीय रुख अपरिवर्तित

17 मई 2026 को अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट की अवधि समाप्त हो गई थी। हालांकि, उसी दिन की देर रात अमेरिकी खزانా विभाग (Treasury Department) ने यह संकेत दिया कि वे उन देशों को इस प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दे सकते हैं जो पहले से ही खरीद कर रहे थे। लेकिन भारतीय अधिकारियों ने इंतजार किए बिना अपना पक्ष रख दिया।

सुजाता शर्मा ने कहा, "हमारा निर्णय पूरी तरह से व्यावसायिक समझ पर आधारित है। देश में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है।" उन्होंने यह भी जोर दिया कि भारत अमेरिकी छूट मिलने से पहले भी रूस से तेल खरीद रहा था, छूट के दौरान भी खरीदा और आगे भी जारी रखेगा। यह स्पष्ट संदेश था कि भारत की ऊर्जा नीति किसी भी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होगी।

परंतु, स्थिति इतनी सरल नहीं है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्रैहाम द्वारा प्रस्तुत एक विधेयक में ऐसे देशों पर 500% टैरिफ लगाने की बात की गई है जो रूस से व्यापार करते हैं। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो भारत के लिए रूसी तेल खरीदना बहुत महंगा पड़ सकता है। इस हफ्ते के अंत तक, यानी 21-23 मई 2026 के बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत दौरे पर आएंगे। उनकी बैठकों में यह मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण रहेगा।

रूस अब भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता

आंकड़े बताते हैं कि रूस ने पिछले तीन वर्षों में भारत के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ता के रूप में ईरान, सऊदी अरब और यूएई को पीछे छोड़ दिया है। जून 2025 में भारत ने रूस से 2.08 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया, जो जुलाई 2024 के बाद से सबसे अधिक है। यह आयात मई 2025 की तुलना में 12.2% अधिक है।

  • ईरान: 18.5%
  • सऊदी अरब: 12.1%
  • यूएई: 10.2%

रूसी तेल की प्रतिस्पर्धी कीमतें, वैकल्पिक शिपिंग नेटवर्क और बीमा सुविधाओं ने भारतीय रिफाइनरियों को लाभान्वित किया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रूसी तेल अभी भी प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों ने रूसी तेल पर $60 प्रति बैरल की कीमत सीमा लगा दी है। भारत इन सीमाओं के भीतर रहते हुए भी अच्छे मुनाफे पर तेल खरीद रहा है।

IOC का आर्थिक निर्णय और भविष्य की चुनौतियाँ

IOC का आर्थिक निर्णय और भविष्य की चुनौतियाँ

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOC), जो भारत सरकार की स्वामित्व वाली कंपनी है, ने 16 मई 2026 को घोषणा की कि वह चालू तिमाही में भी रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगी। IOC के अधिकारियों ने कहा, "इस तिमाही में हम अपनी आर्थिक स्थिति के आधार पर रूसी कच्चे तेल की खरीदारी जारी रखेंगे।"

यह निर्णय केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यावसायिक भी है। भारत अपनी 88% तेल आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है। इसलिए, सस्ते स्रोतों को खोना देश की अर्थव्यवस्था के लिए भारी घाटा ला सकता है। यदि अमेरिकी टैरिफ लागू होते हैं, तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई और बढ़ जाएगी।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अन्य विकल्पों पर भी ध्यान देना होगा। हालांकि, वर्तमान में रूसी तेल सबसे व्यवहार्य विकल्प है। भारत सरकार ने पेट्रोलियम मंत्रालय के जरिए विश्वास दिलाया है कि बाजार में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और भारतीय रिफाइनरियां पूरी तरह से तैयार हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या अमेरिकी छूट समाप्त होने से भारत को रूसी तेल खरीदना बंद करना होगा?

नहीं, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह रूस से तेल खरीद जारी रखेगी। हालांकि, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्रैहाम के प्रस्तावित 500% टैरिफ विधेयक को पारित होने की स्थिति में, खरीद की लागत बढ़ सकती है। वर्तमान में, अमेरिकी खزانा विभाग ने मौजूदा खरीदारों को जारी रखने की अनुमति दी है।

मई 2026 में भारत ने रूस से कितना तेल खरीदा?

मई 2026 में भारत ने रूस से प्रतिदिन 23 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा। यह आंकड़ा जून 2025 के 2.08 मिलियन बैरल प्रतिदिन के आयात के करीब है, जो जुलाई 2024 के बाद से सबसे अधिक स्तर है।

मार्को रूबियो के भारत दौरे का उद्देश्य क्या है?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 21-23 मई 2026 के बीच भारत आएंगे। उनकी बैठकों में रूसी तेल आयात, अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट के नवीनीकरण और दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों पर चर्चा होगी। विशेष रूप से, 500% टैरिफ विधेयक के प्रभाव पर बातचीत की जा सकती है।

क्या भारत की तेल आपूर्ति में कमी आ सकती है?

पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया है कि देश में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है। भारत अपनी 88% तेल आवश्यकता आयात से पूरा करता है और रूस, ईरान, सऊदी अरब और यूएई जैसे स्रोतों से आपूर्ति प्राप्त करता है। वर्तमान में, सभी रिफाइनरियां पूर्ण क्षमता से काम कर रही हैं।

लिंडसे ग्रैहाम का 500% टैरिफ विधेयक क्या है?

यह एक अमेरिकी विधेयक है जिसमें उन देशों पर 500% टैरिफ लगाने की बात की गई है जो रूस से तेल, प्राकृतिक गैस या यूरैनियम खरीदते हैं। इसका उद्देश्य युद्ध के दौरान रूस पर आर्थिक दबाव बनाना है। यदि यह पारित होता है, तो भारत के लिए रूसी तेल खरीदना अत्यंत महंगा हो जाएगा।