दिवाली घर-परिवार में रोशनी, मिठाइयों और खुशियों का त्योहार है। अक्सर लोग आखिरी मिनट में तैयारियाँ करते हैं और कुछ जरूरी चीजें छूट जाती हैं। यह गाइड खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो कम समय में व्यवस्थित, सुरक्षित और अर्थपूर्ण तरीके से दिवाली मनाना चाहते हैं।
दिवाली पर सबसे सामान्य पूजा लक्ष्मी‑गणेश पूजा होती है। पूजा सरल रखें: पहले घर की सफाई करें और मंदिर या पूजा स्थान पर साफ कपड़ा बिछाएँ। शाम के समय दीपक और अगरबत्ती जलाएँ। पूजा के बुनियादी चरण ये हैं —
1) गुरु या परिवार के बुजुर्ग से मंत्र या तरीके जान लें।
2) गणेश जी और माता लक्ष्मी की मोहर/प्रतिमा रखें।
3) दीपक, फूल, फल और मिठाई चढ़ाएँ।
4) आरती के बाद प्रसाद बांटें।
ध्यान रखें कि पूजा में लंबी अनुष्ठानिक प्रक्रियाओं की बजाय दिल से श्रद्धा ज़्यादा मायने रखती है। घर में बच्चों को भी छोटे‑छोटे काम दें — दीप जलाना, फूल सजाना— इससे त्योहार का आनंद बढ़ता है।
सजावट के लिए झाड़ू-धूल हटाने के बाद रंगोली, कैंडल और कागजी या कपड़े के बैगन रखें जो बार-बार इस्तेमाल किए जा सकें। इलेक्ट्रिक लाइट्स लगाते समय तारों को ढंग से छिपाएँ और ओवरलोड न करें।
फटाके खरीदते समय हमेशा मानक और सुरक्षा मार्किंग देखें। अगर आप फटाके जलाना चाहते हैं तो खुली जगह चुनें, बच्चों को दूर रखें और पानी का टब पास रखें। घर के अंदर फटाके जलाने से बचें — यह खतरनाक हो सकता है।
इको‑फ्रेंडली विकल्प आजकल ज्यादा लोकप्रिय हैं: बनावट वाले मोमबत्तियाँ, थ्रेड लेपित दीये, गुब्बारे की जगह पेड़ लगाना, और पेट bottles से बने दीपक। मिठाइयों के पैकिंग के लिए फोम की बजाय पेपर बॉक्स का प्रयोग करें।
बजट पर कंट्रोल चाहिए? ऑनलाइन सेल्स और लोकल मंडियों में तुलना कर लें। मिठाइयाँ घर पर बनाएं — स्वाद बेहतर और खर्च कम। बड़ी खरीदारी से पहले छुट्टियों पर बाजार बंद होने की जानकारी चेक कर लें ताकि आप आखिरी पल में न फँसें।
अंत में, पड़ोस और समुदाय के साथ त्योहार की खुशियाँ बाँटना न भूलें। जरूरतमंदों को दान दें, किसी बुज़ुर्ग से बातें करें, और पर्यावरण का ध्यान रखें। इस तरह दिवाली सुंदर भी बनेगी और सुरक्षित भी।
नरक चतुर्दशी 2024: यम दीपक का महत्त्व और दिशा के रहस्य
नरक चतुर्दशी दिवाली से पहले मनाई जाती है और यम दीपक की सही दिशा में प्रज्ज्वलन से अकाल मृत्यु से रक्षा होती है। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर यम दीपक दक्षिण दिशा में जलाया जाता है, जो यमराज से जुड़ी मानी जाती है। यह परंपरा भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं में गहराई से रची-बसी है, इसे सही ज्ञान और समझ के साथ मनाना अहम है।