आयकर (Income Tax) सुनने में डर देता है, पर सही जानकारी और थोड़ी तैयारी से आप इसे आराम से निपटा सकते हैं। यहां आसान भाषा में फाइलिंग, स्लैब, कटौती और रोज़मर्रा की गलतियों से बचने के टिप्स दिए जा रहे हैं ताकि अगली बार फॉर्म भरते समय आप घबराएं नहीं।
यदि आपकी सालाना आय रक्कम कर योग्य सीमा से ऊपर है तो आयकर रिटर्न (ITR) भरना अनिवार्य है। सैलरी, फ्रीलांस कमाई, संपत्ति से किराया या निवेश पर मिलने वाली आमदनी—सब जोड़कर देखें। कुछ मामलो में कम आय होने पर भी ITR भरना अच्छा रहता है, जैसे बैंक से टैक्स रिफंड लेना या वीजा/लोन के लिए प्रमाण चाहिए।
टीडीएस कटता है तो रिटर्न भरना टर्न-ऑन रहता है ताकि आप कटे हुए टैक्स की वापसी ले सकें। पीएफ, ग्रेच्युटी या नौकरी बदलने पर भी दस्तावेज़ सही रखें क्योंकि ये रिटर्न में दिखाने होते हैं।
हर साल सरकार कर स्लैब बदल सकती है। इसलिए फ़ाइल करने से पहले उस वित्तीय वर्ष की स्लैब और रिलीफ देखें। आम तौर पर तनख्वाह पर टैक्स स्लैब के हिसाब से लगता है।
मुख्य कटौतियाँ जिनका आप फायदा उठा सकते हैं: 80C (पीएफ, पेम्यू, ELSS) — सालाना सीमा; 80D (हेल्थ इंश्योरेंस) — परिवार के लिए प्रीमियम; 80TTA/80TTB (बचत खाते पर ब्याज) — सीमित छूट। हाउस लोन पर मूलधन और ब्याज के अलग-अलग लाभ मिलते हैं।
सरकार ने नया और पुराना टैक्स रेगिम बदल कर विकल्प दिए हैं। नया नियम कम दिक्कत वाला हो सकता है पर कटौतियाँ कम मिलती हैं। पुराने नियम में आप 80C/80D जैसी छूट जोड़कर टैक्स बचा सकते हैं। अपने सालाना खर्च और निवेश देखकर दोनों का कैलकुलेशन कर लें।
आसान तरीका: एक बार साल में चार-पांच मिनट निकाल कर ऑनलाइन ITR कैलकुलेटर से दोनों का हिसाब लगाएं। इससे पता चल जाएगा कौन सा बेहतर है।
फाइल करते समय PAN और Aadhaar लिंक जरूरी है। ई-फाइलिंग पोर्टल पर फॉर्म भरो, जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और सत्यापन (EVC या Aadhaar OTP) कर दें।
TDS से जुड़ी बात: जब आपकी सैलरी या पेमेंट पर TDS कटता है तो आपको फ़ॉर्म 16/16A मिलना चाहिए। वेरीफाई करें कि आपका TDS सही तरीके से इनकम टैक्स पोर्टल पर दिख रहा है। ग़लत TDS दिखे तो नियोक्ता या पेडर से मिलकर सुधार करवाएं।
रिफंड चाहिए तो बैंक अकाउंट सही और IFSC दर्ज करें। रिफंड देरी हो रही हो तो ITR स्टेटस पोर्टल पर ट्रैक करें और नोटिस आने पर समय पर जवाब दें।
आम गलतियाँ जिनसे बचें: 1) बैंक के इंटरेस्ट और FD की इनकम न दिखाना, 2) टीडीएस क्रॉस-चेक न करना, 3) गलत दस्तावेज अपलोड करना, 4) PAN/Aadhaar लिंक न करना। ये छोटी-छोटी गलतियाँ बाद में परेशानी बढ़ा देती हैं।
अगर टैक्स जटिल हो—जैसे कैपिटल गेन, फॉरेन इनकम या धारा 44AD—तो योग्य CA या टैक्स एडवाइजर से सलाह लें। छोटे मामलों में भी ऑनलाइन हेल्प और सरकारी FAQ बहुत मददगार होते हैं।
अंत में एक प्रैक्टिकल टिप: साल भर में डॉक्युमेंट्स फोल्डर बनाकर रखें—Form 16, बैंक स्टेटमेंट, इंश्योरेंस रसीद, हेल्थ प्रीमियम। रिटर्न भरते समय सब कुछ हाथ के पास होने से काम जल्दी और सही तरीके से हो जाता है।
आयकर ऑडिट रिपोर्ट की अंतिम तारीख अब 7 अक्टूबर: आपको क्या जानना चाहिए
आयकर विभाग ने मूल्यांकन वर्ष 2023-24 के लिए ऑडिट रिपोर्ट जमा कराने की अंतिम तारीख को 30 सितंबर 2024 से बढ़ाकर 7 अक्टूबर 2024 कर दिया है। इस निर्णय के पीछे ई-फाइलिंग पोर्टल में तकनीकी समस्याएं मुख्य कारण रही हैं। यह विस्तार उन सभी करदाताओं पर लागू होगा जिनके लिए आयकर दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2024 है।