एक शांत सत्संग में भी अचानक कोई हादसा हो सकता है — बिजली गिरना, भीड़भाड़, फायर, पिक्चर या मंच ढहना। ऐसे समय में घबराने से काम बिगड़ता है। यहां सीधी और काम की सलाह दी जा रही है ताकि आप मौके पर सुरक्षित निर्णय ले सकें और दूसरों की मदद कर सकें।
पहला काम: खुद और साथ वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। आगे बढ़ने से पहले जल्दी से आस-पास का खतरा देखें — आग, टूटे हुए तार, भारी भीड़।
फौरन फोन निकालकर लोकल इमरजेंसी नंबर (112) पर कॉल करें और साफ-सुथरी जगह से घटना का पता व संख्या बताएं।
यदि कोई घायल है तो शांत रहें और प्राथमिक उपचार करें: घुटने पर गंभीर चोट हो तो हिलाएँ नहीं, खून बहने पर साफ कपड़े से दबाव दें। CPR की जानकारी हो तो जरूरत पर लागू करें।
भीड़ को नियंत्रित करना जरूरी है। जोर-ज़ोर से चिल्लाने की बजाय व्यवस्थित निर्देश दें — लोगों को निकास की तरफ धीरे-धीरे चलने के लिए कहें। पैनिक फैलने पर और नुकसान बढ़ता है, इसलिए शांत रवैया अपनाएं।
यदि बिजली या गैस-संबंधी खतरा है तो तुरंत मुख्य स्विच बंद करवाएँ और लोगों को दूर हटाएँ। बच्चों और बुजुर्गों की मदद पहले करें।
हेडर या मंच गिरने जैसी स्थिति में, खुद को सुरक्षित स्थान पर रखकर पेशेवर मदद का इंतजार करें और घायल व्यक्ति को अनावश्यक हिलाएं नहीं।
आयोजन करने वाले लोग हादसे की सम्भावना कम करने के लिए पहले से तैयारी रखें। छोटा-सा चेकलिस्ट यहां है जो काम का है:
अगर हादसा हो गया है तो रिकॉर्ड रखें — फोटो, गवाह, और टाइमलाइन। यह आगे जांच और मुआवजे में काम आता है। पीड़ितों को न्याय और मनोवैज्ञानिक मदद दिलवाना भी आयोजकों की जिम्मेदारी है।
अंत में, सत्संग का मकसद शांति और एकता है। थोड़ी सी तैयारी और समझदारी हादसों को टाल सकती है और अगर कुछ हो भी जाए तो नुकसान कम कर सकती है। आप किसी आयोजन में जा रहे हैं तो अपने नज़दीकी एग्जिट और इमरजेंसी नंबर याद रख लें — ये छोटी आदतें बड़ी मदद करती हैं।
हाथरस सत्संग में भगदड़: कई मौतें और सुधृढ़ संख्या में घायल
उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए एक धार्मिक सत्संग कार्यक्रम के दौरान भगदड़ से कई लोगों की मौत हो गई और अनेक लोग घायल हो गए। हादसे के कारण की जांच की जा रही है और राहत कार्य जारी है।