अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS): क्या है, कैसे काम करता है और इसे कैसे देखें

क्या आपने कभी अंधेरी रात में एक तेज़ रोशनी को आसमान में उड़ते हुए देखा है और सोचा होगा कि वह क्या है? अक्सर वो अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी ISS होता है। यह जमीन से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर एक बड़ा प्रयोगशाला स्टेशन है, जो इतनी तेज़ी से उड़ता है कि पृथ्वी की परिक्रमा लगभग 90 मिनट में पूरी हो जाती है।

ISS पर लगातार इंसान 2000 के बाद से मौजूद रहे हैं। इसका मकसद अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोग करना, पृथ्वी की निगरानी करना और दीर्घकालिक अंतरिक्ष यात्राओं के लिए तकनीकें विकसित करना है। छोटे से छोटे जैविक परीक्षण से लेकर बड़ी भौतिकी की प्रयोगशालाओं तक यहां काम होते हैं।

ISS का मकसद और प्रमुख हिस्सेदार

ISS एक अंतरराष्ट्रीय परियोजना है जिसमें NASA (अमेरिका), Roscosmos (रूस), ESA (यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी), JAXA (जापान) और CSA (कनाडा) जैसे सदस्य शामिल हैं। हर देश ने स्टेशन के अलग हिस्सों, मॉड्यूल या उपकरणों में योगदान दिया है — जैसे Zarya, Zvezda, Columbus, Kibo और Harmony।

यहां रोबोटिक आर्म, माइक्रोग्रैविटी लैब और पृथ्वी अवलोकन के उपकरण लगे होते हैं। रेस्पलाइ और क्रू रोटेशन के लिए Progress, Dragon, Cygnus जैसे यान आते हैं। ISS पर होने वाले प्रयोगों से दवाइयों, सामग्री विज्ञान और कृषि जैसी चीजों में नए समाधान मिलते हैं।

इसे कैसे देखें: आसान तरीके और टिप्स

ISS को देखने का सबसे आसान तरीका है कि आप उसकी पासिंग टाइम्स जान लें। आम तौर पर यह सुबह या शाम के पास दिखाई देता है, जब सूरज स्टेशन को रोशन कर रहा हो पर आप पृथ्वी पर अँधेरे में हों। यह सितारे की तरह चमकता है, पर स्थिर नहीं — तेज़ी से चलता हुआ लगता है और टिमटिमा नहीं करता।

उपयोगी टिप्स: स्मार्टफोन पर "Heavens-Above" या "Spot the Station" जैसी ऐप्स लगाकर अपने शहर के लिए पासिंग समय देख लें। पासिंग आमतौर पर 2-6 मिनट तक रहती है — सेल्फोन निकालिए, आकाश की उस दिशा में देखें और ISS को एक चमकते सितारे की तरह गुजरते हुए पाएं।

अगर आपके पास एक छोटा टेलीस्कोप है, तो कभी-कभी आप स्टेशन के कुछ हिस्सों या उससे जुड़े बड़े पैनलों को भी देख पाएंगे, पर अधिकांश समय naked eye से ही देखना सरल और मज़ेदार होता है।

ISS से जुड़ी लेटेस्ट खबरें और मिशन अपडेट जानने के लिए NASA की वेबसाइट और संबंधित अंतरिक्ष एजेंसियों के सोशल मीडिया पेज देखिए। NASA ने ISS के संचालन को कम से कम 2030 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, और उसके बाद स्टेशन को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी वायुमंडल में जलाने की योजना हो सकती है।

अगर आप बच्चों को अंतरिक्ष के बारे में उत्साहित करना चाहते हैं तो उनके साथ ISS की पासिंग देखिए, कुछ सरल प्रयोगों की जानकारी शेयर करें और उन्हें बताएं कि किस तरह वैज्ञानिक वहां रोजाना काम करते हैं। यही छोटा अनुभव भविष्य के वैज्ञानिकों को प्रेरित कर सकता है।

ISS सिर्फ एक स्टेशन नहीं, बल्कि देशों के बीच सहयोग और विज्ञान का प्रतीक है। अगली बार जब आप रात में चमकता हुआ तेज बिंदु देखें, तो समझिए—वही मानवता का छोटा सा घर है जो हमारे ग्रह के ऊपर घूम रहा है।

भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने बोइंग स्टारलाइनर से रचा इतिहास

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भारतीय मूल की नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने इतिहास रचते हुए एक नए मानव-रेटिड अंतरिक्ष यान, बोइंग के स्टारलाइनर पर उड़ान भरी। अपने सहयोगी बटच विलमोर के साथ, उन्होंने इस ऐतिहासिक यात्रा पर कदम रखा। यह मिशन अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर गया, जिसमें अनेक तैयारियां और परीक्षण शामिल थे। यह सफलता बोइंग को लंबी अवधि की परिचालन मिशनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है।