जब किसी को गिरफ़्तार करते हैं तो जमानत (Bail) उसका अस्थायी रिहाई का तरीका है। साधारण भाषा में, जमानत का मतलब है कि आरोपी कोर्ट में पेश होने की शर्त पर कुछ शर्तें पूरी करके घर जा सकता है। जमानत दो तरह की मिलती है: गिरफ्तारी के बाद की जमानत और अग्रिम (anticipatory) जमानत।
यह पेज आपको तेज़ और साफ़ तरीके से बताएगा कि किस तरह जमानत के लिए आवेदन करें, कौन‑से दस्तावेज चाहिए और कोर्ट में क्या उम्मीद रखें।
गिरफ्तारी के बाद की जमानत: जब पुलिस ने आपको पकड़ लिया हो। आप पुलिस स्टेशन से मजिस्ट्रेट के पास जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं या वकील के जरिए हाई कोर्ट/सेशन कोर्ट में भी याचिका दायर की जा सकती है।
अग्रिम (Anticipatory) जमानत: अगर आपको डर है कि आपके खिलाफ गिरफ्तारी हो सकती है तो आप पहले ही अदालत से अग्रिम जमानत मांग सकते हैं। यह हाई कोर्ट या सेशन कोर्ट से मांगी जाती है।
नीचे आसान कदम हैं जिन्हें देकर आप जमानत की प्रक्रिया तेज कर सकते हैं:
कई बार जमानत नामंजूर हो जाती है—ऐसा तब होता है जब आरोप गंभीर हों, आरोपी भागने का खतरा दिखे या सबूत मिटाने की आशंका हो। ऐसे मामलों में हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में ऊपर अपील की जा सकती है।
आख़िर में कुछ सरल सलाह: गिरफ्तारी के बाद शांत रहें, पुलिस के साथ आक्रामक व्यवहार न करें, तुरंत वकील बुलाएं और अपने परिवार को सूचना दें। कोर्ट की प्रक्रिया समझकर शर्तें सही तरीके से पूरी करें। अगर आप समय पर पेश होते हैं और शर्तों का पालन करते हैं तो जमानत पाने की संभावना बढ़ जाती है।
अगर आप चाहें तो मैं आपको जमानत के लिए जरूरी दस्तावेज़ों की सूची, पता‑आधार चेकलिस्ट और कोर्ट में रखने योग्य छोटे नोट भी दे सकता/सकती हूँ—बताइए किस राज्य या कोर्ट से जुड़ा मामला है।
अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिकाएं टलीं, कल शाम तक जेल लौटना होगा
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 2018 में पूर्व मुख्य सचिव अंशु प्रकाश पर कथित हमले के मामले में फिर से जेल लौटना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाओं पर सुनवाई टाल दी है, जिसके कारण उन्हें कल शाम तक सरेंडर करना पड़ेगा। अदालत ने उन्हें दिल्ली विधानसभा के बजट सत्र में भाग लेने के लिए अंतरिम जमानत दी थी, जो कल समाप्त हो रही है।