बुधवार, 31 मार्च 2026 को नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक क्षण हुआ जब भारतीय टेनिस के सूर्य लींडर पेस, ओलंपिक कांस्य पदक विजेता खिलाड़ी ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अपनाया। यह केवल एक पार्टी से जुड़ने की घटना नहीं थी, बल्कि एक किस्सा था जिसमें 51 साल के इस क्रीड़ा विश्वस्तार ने अपनी उल्लेखनीय खेल करियर को सक्रिय राजनीति में बदला है। यह मुहर अगले वर्ष होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले लगाई गई है, जहाँ मौजूदा सत्ता ट्रायनामूल कांग्रेस के पास है।
यह सब कुछ इसलिए खास इसलिए है क्योंकि लींडर पेस अब पहले ही बार किसी राष्ट्रीय पार्टी में शामिल हो रहे हैं। हालाँकि, राजनीति उनके लिए नई शुरुआत नहीं है। पिछले पंढ्रह साल पहले वे ट्रायनामूल कांग्रेस (टीएमसी) के झंडे तले थे। अब उनका इन्तखाल दूसरी तरफ होना एक बड़ा चिन्ह है जो पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दृष्टि को बदल सकता है।
दिल्ली में आयोजित औपचारिक कार्यक्रम और महत्वपूर्ण उपस्थिति
कार्यक्रम भाजपा मुख्यालय, नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। वहां किरेन रिजिजू, केंद्रीय मंत्री और सुकांत मजुमदार, शिक्षा मंत्रालय राज्य मंत्री जैसे बड़े चेहरे मौजूद थे। रिजिजू का कहना था कि लींडर पेस को परिचित करने की कोई आवश्यकता नहीं है; पूरे भारत में उनकी पहचान अपने आप सेट है। उन्होंने कहा, "पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा खेल और एथलीटों के लिए किए गए काम से प्रेरित होकर लींडर ने हमारे घर का हिस्सा बनने का फैसला किया है।"
उसी दिन, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की बात भी खूब हुई। सुकांत मजुमदार, जो खुद बलरघाट सीट से सांसद हैं, ने स्पष्ट किया कि पेस के आने से पार्टी की पहुंच बढ़ेगी। उनका मानना है कि युवा वर्ग, जो आज सबसे ज्यादा इंटरैक्ट करता है, पेस के साथ जुड़ेगा। यह रणनीति स्पष्ट रूप से पश्चिम बंगाल की भूमिका को ध्यान में रखती है, जहां राजनीति का माहौल बहुत ही संवेदनशील है।
खेल मैदान से राजनीति तक: एक अद्वितीय यात्रा
लींडर पेस जब भाषण दे रहे थे, तो उन्हें उदासीन नहीं किया जा सकता था। उन्होंने कहा, "यह मेरे जीवन का एक बड़ा दिन है। मैंने सच्चाई में जीवित रहने के लिए गेम खेलना शुरू किया था। लेकिन अब इस पार्टी का सदस्य होना जिम्मेदारी है।" उनकी भाषा में वही ईमानदारी थी जो उन्हें पिस्टल के रूप में पहचानी जाती रही है। उन्होंने आगे कहा कि भारत का युवा जनसांक्य एक 'क्रांतिकारी' अवसर है, जहाँ खेल शिक्षा और बुनियादी ढांचे की जरूरत है।
उनकी कुशलता के बारे में बात करना कम है। तीन दशकों से अधिक की करियर में, उन्होंने 18 ग्रैंड स्लैम शीर्षक जीते हैं। 1996 में अटलंटा ओलंपिक में पुरुषों के सिंगल में कांस्य पदक जीतना उनके लिए गर्व की बात है। अगर हम उनके परिवार की बात करें, तो वे खेल के घर से आए हैं। उनके पिता वेसे पेस गोवा के थे, जो 1972 मुंबई हॉकी टीम के कांस्य पदक विजेताओं में थे। माता जेनिफर पेस भारत की महिला बास्केटबॉल टीम की कैप्टन रही थीं। तो यही अनुभव उन्हें नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद करता होगा।
पार्टी बदलने के पीछे का राजनीतिक संदर्भ
यहाँ एक रोचक मोड़ है। अक्टूबर 2021 में, लींडर पेस ने ममता बनर्जी की ट्रायनामूल कांग्रेस (टीएमसी) में प्रवेश किया था। गुवाहाटी में तब टीएमसी झंडा लेकर उन्होंने पदार्पण किया था। उस समय गोवा के आम चुनावों के लिए भी उन्होंने अभियान चलाया था। लगभग पांच साल बाद, अब वे वापस मुड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। यह बदलाव पश्चिम बंगाल के 2026 के चुनावों के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है। स्थानीय नेताओं ने इसकी काफी चर्चा की है। क्या यह बंगाल में बीजेपी की छवि को सुधारता है? उत्तर सरल नहीं है, लेकिन पेस की लोकप्रियता निश्चित रूप से एक फायदेमंद कार्ड हो सकती है।
वहीं दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने खेल विकास के लिए 'खेलो इंडिया' जैसे कार्यक्रम शुरू किए हैं। पेस ऐसे ही क्षेत्रों में योगदान देने की उम्मीद जता रहे हैं। रिजिजू ने उन्हें एक बड़ी 'इनिंग्स' खेलने की उम्मीद व्यक्त की। यह आशा के भरोसे पर है कि खेल और राजनीति के बीच वह एक बेहतरीन सेतु बना सकते हैं।
अगले कदम और अपेक्षाएं
अब सवाल यह उठता है कि लींडर पेस किस सीट से चुनाव लड़ेंगे? अभी तक कोई घोषणा नहीं की गई है। चूंकि वे गोवा में रहते हैं लेकिन कलकत्ता में पैदा हुए, इसलिए दोनों राज्यों में उनका असर देखने मिल सकता है। पश्चिम बंगाल में निर्णय जल्द लिया जा सकता है। इसके अलावा, खेल मंत्रालय में उनकी कोई विशेष भूमिका होगी या नहीं, यह देखने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
लींडर पेस ने भाजपा क्यों चुना?
लींडर पेस ने कहा कि यह उनकी देश सेवा की जिम्मेदारी है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा पिछले 12 वर्षों में खेल और एथलीटों के लिए किए गए काम से प्रभावित थे। उन्हें यह भी उम्मीद है कि वे भारत के युवाओं को खेल के क्षेत्र में बेहतर अवसर प्रदान करने में सहायता कर सकेंगे।
क्या पेस पहले किसी और पार्टी में थे?
हां, अक्टूबर 2021 में लींडर पेस ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में प्रवेश किया था और उन्होंने 2022 के गोवा चुनावों में अभियान चलाया था। अब लगभग पांच साल बाद उन्होंने अपना रुख बदला है और भाजपा में शामिल हो गए हैं।
पश्चिम बंगाल के लिए इसका क्या मतलब है?
2026 के विधानसभा चुनावों से पहले यह कदम बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण है। पेस का पश्चिम बंगाल, जहां वे जन्मे थे, से जुड़ाव और उनकी युवाओं में लोकप्रियता पार्टी के लिए एक बड़ा लाभ हो सकती है। सुकांत मजुमदार ने इसी बात को दोहराया है।
पेस ने राजनीति में अपनी भूमिका क्या बताई?
उन्होंने कहा कि उन्हें खेल शिक्षा और बुनियादी ढांचे का विस्तार करने में सक्षम बनाया जाना चाहिए। वे इसे केवल एक सदस्यता पर्ची नहीं मानते बल्कि राष्ट्र सेवा का एक अवसर। उनकी मुख्य प्राथमिकता युवाओं के विकास के लिए खेल नीतियों को बेहतर बनाना है।