अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) दुनिया की सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंक है। इसके फैसले सिर्फ अमेरिका नहीं बल्कि ग्लोबल मार्केट, रुपये की वैल्यू, बॉन्ड रेट और सोने-स्टॉक्स सब पर असर डालते हैं। अगर आप निवेश करते हैं या लोन पर हैं, तो फेड की खबरें आपके लिए सीधे मायने रखती हैं।
फेड का मुख्य काम महंगाई को नियंत्रित करना और आर्थिक वृद्धि को स्थिर रखना है। इसके प्रमुख टूल हैं:
FOMC (Federal Open Market Committee) आम तौर पर साल में आठ बार मिलकर नीति दर पर फैसला करती है। उनके मिनट्स, प्रेस कॉन्फ्रेंस और चेयर के बयान मार्केट को दिशा देते हैं।
फेड दर बढ़ाए तो डॉलर मजबूत होता है और रुपया दबाव में आ सकता है। इससे आयात महँगा होगा और पेट्रोल-गैस जैसे वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी दरें बढ़ीं तो ग्लोबल फंडें उभरते बाजारों से बाहर आ सकती हैं, जिससे भारतीय शेयर और बॉन्ड गिर सकते हैं।
ब्याज दरों का असर आपकी पूंजी पर भी पड़ता है: फिक्स्ड डिपॉज़िट, होम लोन, कार लोन—सबकी कीमत बदल सकती है। इन्वेस्टर के तौर पर आप क्या कर सकते हैं?
किस तरह अपडेट रहें: फेड की आधिकारिक वेबसाइट (federalreserve.gov), FOMC कैलेंडर, और भरोसेमंद न्यूज़ सोर्स—Bloomberg, Reuters के फेड कवरेज पर नजर रखें। आप CME FedWatch टूल से संभावित दर कटीविटी का अनुमान देख सकते हैं।
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दर कटौती: पहली बार 2020 के बाद पावेल की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर निगाहें
फेडरल रिजर्व 17-18 सितंबर की बैठक में चार वर्षों में पहली बार ब्याज दर घटाने की संभावना है। यह महत्वपूर्ण पॉलिसी बदलाव माना जा रहा है। फेड चेयर जेरोम पावेल की प्रेस कॉन्फ्रेंस 18 सितंबर को होगी, जिसे निवेशक और व्यापारी भविष्य की नीति दिशाओं के लिए बारीकी से देखेंगे। श्रम बाजार की स्थिति अब मुद्रास्फीति से ज्यादा महत्व रखती है।