आरबीआई (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) के फैसले सीधे आपके बैंक बैलेंस, FD दरों, EMI और लोन कॉस्ट पर असर डालते हैं। इस पेज पर हम सिर्फ खबरें नहीं देते — इसका मकसद है कि आप समझ सकें कि कोई रेपो रेट बदलाव या सर्कुलर आपके लिए क्या मतलब रखता है।
यह टैग पेज तीन तरह की प्रमुख जानकारी दिखाता है: मौद्रिक नीति और रेपो रेट के अपडेट, बैंकिंग नियम व सर्कुलर (जैसे KYC, एनपीए दिशा-निर्देश), और नोट/क्वायरेंसी से जुड़ी घोषणाएँ। साथ ही, RBI गवर्नर के बयान, बैंकिंग छुट्टियों संबंधी सूचनाएँ और बैंकिंग सेक्टर पर असर डालने वाली रिपोर्ट्स भी यहाँ मिलती हैं।
हर खबर के साथ हम उस फैसले का साधारण भाषा में असर भी बताते हैं — जैसे किसे बचत खाते की दर बदलने की संभावना है, किस तरह के कर्ज पर असर होगा, और निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए।
आरबीआई की खबरें पढ़कर आप तुरंत निर्णय ले सकते हैं: FD खोलना है या नहीं, होम लोन रिफाइनेंस करना चाहिए या इंतजार, अकाउंट टाइप बदलना है या नहीं। छोटे व्यापारी और फ्रीलांसर भी यहाँ से टैक्स-पेयर या बैंकिंग प्रक्रियाओं के बारे में प्रायोरिटी अपडेट पा सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर, अगर रेपो रेट घटता है तो आमतौर पर होम लोन की EMI कम होने की उम्मीद बनती है — लेकिन बचत दरें भी कम हो सकती हैं। ऐसे में हम आपको बताएंगे कि किस तरह के बैंकिंग उत्पाद में शिफ्ट करना बेहतर रहेगा।
हम हर खबर के साथ स्रोत और तारीख शामिल करते हैं, ताकि आप जान सकें खबर ताज़ा है या पुरानी। अगर किसी सर्कुलर का टेक्निकल हिस्सा हो तो हम उसे सरल भाषा में संक्षेप कर देते हैं।
आप ताज़ा अपडेट पाना चाहते हैं तो पेज को बुकमार्क करें या नोटिफिकेशन ऑन रखें। बड़ी नीतिगत घोषणाओं पर हम गहरी वाक्य-विश्लेषण वाली रिपोर्ट भी देते हैं, जिसमें संभावित असर और सलाह शामिल रहती है।
अगर आप निवेशक हैं तो RBI से जुड़ी खबरें पढ़कर अपने पोर्टफोलियो का जोखिम और समय-सीमा देख लें। नॉन-प्रोफिट या व्यापार चलाने वालों के लिए बैंकिंग नियमों के बदलने का सीधा असर होता है — यहाँ वही जरूरी टैग्ड लेख मिलेंगे।
इस पेज पर आने वाले लेखों को नियमित रूप से अपडेट किया जाता है। नीचे दिए गए आर्काइव और संबंधित टैग्स देखें — जैसे "बैंकिंग नियम", "मौद्रिक नीति", "नोटबंदी" — ताकि आप वही खबरें जल्दी पा सकें जो आपके काम की हों।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 8 अगस्त, 2024 को अपनी ताजा द्विमासिक बैठक आयोजित की और रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखा। वर्तमान आर्थिक हालात और मुद्रास्फीति प्रवृत्तियों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। आरबीआई ने वित्त वर्ष 25 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 7.2% लगाया।