नरक चतुर्दशी जिसे कई जगह "चोटी दिवाली" भी कहा जाता है, दीपावली से एक दिन पहले पड़ती है। मान्यताएँ बताती हैं कि भगवान कृष्ण ने असुर नारकासुर का वध इसी तिथि को किया था और लोग बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में इसे मनाते हैं। यह दिन घर की सफाई, तेल स्नान और दीप जलाने का माना जाता है।
तिथि साल-दर-साल बदलती है, इसलिए पंडित या स्थानीय पंचांग से सही समय (तृतीया/चतुर्दशी) और स्नान का मुहूर्त जरूर देखें। आम तौर पर सुबह सूर्योदय से पहले तेल व हल्दी से स्नान करने की परंपरा है। अगर आप समय नापने में असहज हैं तो स्थानीय मंदिर या ऑनलाइन पंचांग देखकर निश्चित समय लें।
यहां एक आसान और उपयोगी रूटीन दिया जा रहा है जिसे आप घर पर कर सकते हैं:
ध्यान दें: आतिशबाज़ी करते समय बच्चों का खास ख्याल रखें और सुरक्षित दूरी रखें। अगर आप पटाखे नहीं जलाना चाहते तो दीयों और रंगोली से घर सजाएं—यह पर्यावरण के लिए बेहतर है।
क्या आप काम में व्यस्त हैं? छोटी पूजा भी असरदार होती है। 10-15 मिनट के लिए दीप जलाकर मन से शुभकामना दें, परिवार के साथ हल्का भोजन और मिठाई बांटें। छोटे संकेत भी त्यौहार को खास बना देते हैं।
अंत में, अगर आप यात्रा कर रहे हैं तो घर लौटकर ही पूजा करें या किसी नज़दीकी मंदिर में शामिल हो जाएँ। बड़े आयोजन में भीड़ और ध्वनि दूषण से बचें। अपने घर और पास के लोगों की सुरक्षा पहले रखें।
नरक चतुर्दशी को परम्परा और सुरक्षा दोनों का संतुलन बनाकर मनाएँ—तेल स्नान की सादगी, दीयों की रोशनी और दूसरों के साथ त्यौहार की खुशी बांटें। शुभकामनाएँ।
नरक चतुर्दशी 2024: यम दीपक का महत्त्व और दिशा के रहस्य
नरक चतुर्दशी दिवाली से पहले मनाई जाती है और यम दीपक की सही दिशा में प्रज्ज्वलन से अकाल मृत्यु से रक्षा होती है। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर यम दीपक दक्षिण दिशा में जलाया जाता है, जो यमराज से जुड़ी मानी जाती है। यह परंपरा भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं में गहराई से रची-बसी है, इसे सही ज्ञान और समझ के साथ मनाना अहम है।