एक्शन थ्रिलर वो жанर है जो एड्रेनालाईन और दिमाग दोनों को एक्टिव रखता है। क्या आप तेज़ एक्शन, उलटफेर और लगातार सस्पेंस चाहते हैं? ठीक है, यही वे फिल्में हैं जो आपको सीट के किनारे पर रखती हैं। इस पेज पर मैं आसान भाषा में बताऊँगा कि किस तरह की एक्शन थ्रिलर चुनें, किन बातों पर ध्यान दें और कुछ भरोसेमंद सुझाव भी दूँगा।
सबसे पहले तय करें कि आपको किस तरह का संतुलन चाहिए — पूरी तरह एक्शन या कहानी-केंद्रित थ्रिलर? अगर आपको स्टंट्स और तेज़ पेस चाहिए तो बड़े बजट वाली हॉलीवुड या दक्षिण भारतीय एक्शन फिल्मों पर ध्यान दें। अगर आप बौद्धिक सस्पेंस पसंद करते हैं तो डार्क क्राइम थ्रिलर या मनोवैज्ञानिक थ्रिलर बेहतर रहते हैं।
देखते समय इन चीज़ों पर नजर रखें: प्लॉट में निरंतरता, किरदारों की मजबूती, और कसी हुई एडिटिंग। कभी-कभी जब एक्शन बहुत ज्यादा हो और स्टोरी कमजोर, तो फिल्म केवल दिखावटी लगती है। असली मज़ा तब आता है जब एक्शन और कहानी साथ चलते हैं।
रेटिंग और रिव्यू देखें, पर सिर्फ स्कोर पर निर्भर मत होइए। छोटा बड्जेट भी जब क्रिएटिव हो तो बेहतरीन थ्रिल देता है। ट्रेलर देख लें, लेकिन स्पॉयलर से बचें — ट्रेलर से आपको टोन और पेस का अंदाज़ मिल जाएगा।
एक्शन थ्रिलर देखते वक्त मूड मायने रखता है। रात में बड़े स्क्रीन या साउंड सिस्टम पर देखने से मज़ा बढ़ता है। अपने ध्यान भंग न होने दें; कई थ्रिलर छोटे इशारों पर आगे बढ़ते हैं, जो रूटीन में मिस हो सकते हैं।
भरोसेमंद रेकमेंडेशन के लिए कुछ श्रेणियाँ आजमाएँ: क्लासिक स्पाई-थ्रिलर, क्राइम-नोयर, साइकोलॉजिकल थ्रिलर और मिलिट्री-एक्शन। हिंदी दर्शकों के लिए नई हिंदी-एक्शन थ्रिलर और दक्षिण की फिल्में भी बढ़िया विकल्प हैं।
अगर आप शुरुआत कर रहे हैं तो ये तरीके आजमाएं: एक फिल्म को दो बार देखें — पहली बार एंजॉय करने के लिए, दूसरी बार प्लॉट और क्लूज़ पकड़ने के लिए। दोस्तों के साथ डिस्कस करें; अक्सर छोटी-छोटी बातें मिलकर फिल्म का पूरा अर्थ खुला देती हैं।
अंत में, एक्शन थ्रिलर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह आपको तुरंत जुड़ा हुआ महसूस कराता है। सही फिल्म चुनकर आप तीव्र सस्पेंस और संतोषजनक क्लाइमेक्स दोनों पा सकते हैं। अगर चाहिए, मैं कुछ बेस्ट हिंदी और अंतरराष्ट्रीय एक्शन थ्रिलर की लिस्ट भी बता सकता हूँ—बताइए किस स्टाइल में दिलचस्पी है।
शाहिद कपूर की फिल्म 'देवा' समीक्षा: शिथिल धागों से उलझ कर रह गई कहानी
देवा फिल्म में शाहिद कपूर मुंबई के एक गुस्सैल पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। रोशन एंड्रूज द्वारा निर्देशित यह फिल्म एक्शन, सस्पेंस और ड्रामा का मिश्रण करने का प्रयास करती है लेकिन इसकी अनुमानित कहानी के कारण यह कमजोर पड़ जाती है। देव अंबरे (शाहिद कपूर) अपने दोस्त एसीपी रोहन डिसिल्वा (पवैल गुलाटी) की हत्या का बदला लेने के लिए संघर्ष करता है। हालांकि, फिल्म में कई अप्रत्याशित मोड़ हैं, जो इसके प्रवाह को बाधित करते हैं।