प्रधानमंत्री की शपथ सिर्फ एक रस्म नहीं होती—ये संविधान के प्रति पहली जिम्मेदारी है। शपथ लेने के बाद ही प्रधानमंत्री आधिकारिक रूप से काम शुरू कर पाते हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि शपथ कब, कैसे और किसके सामने ली जाती है, तो यह पेज आसान भाषा में वही जानकारी देगा जो आपको तुरंत चाहिए।
शपथ का पाठ संविधान में तय फॉर्मेट के अनुसार कराया जाता है। राष्ट्रपति या उनके द्वारा नामित अधिकारी ही प्रधानमंत्री को शपथ दिलाते हैं। शपथ में संविधान की रक्षा, देश की निष्ठा और कर्तव्यों का पालन शामिल होता है। साथ ही मंत्रियों से गोपनीयता की शपथ भी करवाई जाती है ताकि सरकार के अंदर की सूचनाएँ सुरक्षित रहें।
आम तौर पर शपथ समारोह राष्ट्रपति भवन में होता है। नया प्रधानमंत्री तब शपथ लेता है जब उसकी सरकार बन जाती है — चुनाव के बाद या जब कोई बदलाव होता है, जैसे इस्तीफा या गठबंधन में बदलाव। शपथ लेने के साथ ही वह आधिकारिक रूप से मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करने के लिए तैयार हो जाता है।
शपथ समारोह में आम तौर पर ये कदम होते हैं: राष्ट्रपति का स्वागत, प्रधानमंत्री का नाम पढ़ा जाना, राष्ट्रपति द्वारा शपथ ग्रहण कराना, और फिर नए मंत्रियों का भी शपथ ग्रहण। कई बार प्रधानमंत्री पहले अकेले शपथ लेते हैं और बाद में पूरे कैबिनेट को एक साथ शपथ दिलाई जाती है।
शपथ के बाद सरकार के अहम काम तुरंत शुरू हो जाते हैं—कैबिनेट की नियुक्तियाँ, प्राथमिक नीतियाँ तय करना, और रिस्पॉन्सिबिलिटी तय होना। शपथ समारोह राजनीतिक मान्यता और वैधानिक अधिकार दोनों देता है।
क्या शपथ बदल सकती है? हाँ। शपथ का टेक्स्ट संविधान द्वारा निर्धारित होता है, पर प्रशासनिक रूप से आयोजन, समय और शामिल होने वालों की सूची बदल सकती है—जैसे गठबंधन सरकार में मंत्रियों की संख्या पर समझौते के मुताबिक बदलाव होते हैं।
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नरेंद्र मोदी का तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ: 8 जून को संभावित तिथि
8 जून को नरेंद्र मोदी तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं, लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद। बीजेपी ने 240 सीटों के साथ अल्प बहुमत प्राप्त किया, लेकिन एनडीए की कुल सीटों की संख्या 295 है। कांग्रेस ने 99 सीटें जीतकर मजबूत प्रदर्शन किया।